छत्तीसगढ़ इस समय भीषण शीतलहर (Cold Wave) और घने कोहरे (Dense Fog) के दोहरे हमले की चपेट में है। सरगुजा संभाग के जिलों में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ रात का तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री नीचे चला गया है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो इस सीजन का सबसे कम तापमान है।
| शहर/स्थान | न्यूनतम तापमान (°C) | स्थिति |
| अंबिकापुर | 3.3° | भीषण शीतलहर |
| मैनपाट | 1.5° | घास पर बर्फ जमा |
| पेंड्रा रोड | 5.8° | कड़ाके की ठंड |
| रायपुर | 11.2° | ठंडी हवाएं |
| जगदलपुर | 9.5° | मध्यम कोहरा |
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) रायपुर के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी शुष्क और ठंडी हवाओं का प्रवाह सीधे छत्तीसगढ़ की ओर बना हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, अगले 72 घंटों तक प्रदेश के उत्तरी और मध्य भागों में ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी रहेगी।
प्रमुख प्रभाव और चेतावनी:
- जमने लगी ओस की बूंदें: सरगुजा, कोरिया और जशपुर के पहाड़ी इलाकों में तापमान जमाव बिंदु (Freezing Point) के करीब पहुँचने से खेतों और घास पर ओस की बूंदें बर्फ की पतली चादर की तरह जमी हुई दिखाई दे रही हैं। इसे स्थानीय स्तर पर ‘पाले’ की स्थिति कहा जा रहा है, जो रबी फसलों के लिए हानिकारक हो सकती है।
- कोहरे का ‘डबल अटैक’: बिलासपुर, पेंड्रा और अंबिकापुर में दृश्यता (Visibility) घटकर 50 मीटर से भी कम रह गई है। सुबह के समय राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवाजाही खतरनाक हो गई है, जिससे लंबी दूरी की बसें और ट्रेनें देरी से चल रही हैं।
- स्वास्थ्य पर असर: डॉक्टरों ने हृदय रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों को सुबह और रात के समय घर के भीतर रहने की सलाह दी है। अचानक बढ़ी इस ठंड से वायरल संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ के मामले बढ़ सकते हैं।
“प्रशासन ने कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव के निर्देश दिए हैं और प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की जा रही है।”
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 जनवरी के बाद हवा की दिशा में हल्का बदलाव हो सकता है, जिससे तापमान में मामूली वृद्धि की संभावना है। तब तक, लोगों को गर्म कपड़ों और हीटिंग उपकरणों के सुरक्षित उपयोग के साथ सतर्क रहने की आवश्यकता है।

















