छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहा अभियान तेजी से सफल हो रहा है। साल 2025 में अब तक सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में 284 माओवादियों को मार गिराया है। इनमें से ज्यादातर बस्तर क्षेत्र में ढेर हुए। साथ ही सैकड़ों नक्सली सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का है, और छत्तीसगढ़ इसमें आगे है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि एंटी-नक्सल ऑपरेशन से राज्य जल्द ही “विकसित छत्तीसगढ़” की ओर बढ़ेगा। बस्तर के जंगलों में नए सुरक्षा कैंप बन रहे हैं, जिससे नक्सलियों के ठिकाने कमजोर हो रहे हैं।
2025 की प्रमुख सफलताएं
इस साल कई बड़े ऑपरेशन हुए:
- दिसंबर में सुकमा और बीजापुर में मुठभेड़ें: सुकमा में 3 नक्सली (एक महिला सहित) ढेर। बीजापुर में 5 लाख इनामी नक्सली समेत कई मारे गए। दिसंबर शुरुआत में बीजापुर में 12 नक्सली ढेर, जबकि कुछ जवानों ने भी शहादत दी।
- नए फॉरवर्ड बेस: CRPF ने 2019 से अब तक 229 नए कैंप बनाए, सिर्फ 2025 में 59। इससे नक्सली इलाकों में पुलिस की पहुंच बढ़ी।
- सरेंडर की बाढ़: दिसंबर में बीजापुर में 34 नक्सली सरेंडर। पूरे साल में 500 से ज्यादा सरेंडर, जो नक्सलियों की हताशा दिखाता है।
- कुल आंकड़े: 2025 में बस्तर में 96 मुठभेड़ें, 252 नक्सली ढेर। पूरे राज्य में गिरफ्तारियां और सरेंडर हजारों में।
सुरक्षा बलों में DRG, CoBRA और बस्तरिया बटालियन की बड़ी भूमिका है। ये स्थानीय युवाओं से बनी टीम्स जंगलों को अच्छे से जानती हैं।
क्यों कमजोर हो रहे नक्सली?
- बड़े लीडर्स ढेर: इस साल कई टॉप कमांडर मारे गए।
- IED और हमलों में कमी: नक्सली अब घबराकर IED ब्लास्ट या छोटे हमले कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा बल जवाबी कार्रवाई में आगे।
- सरकारी नीतियां: “पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी योजनाओं से सरेंडर करने वालों को नौकरी, पैसा और सुरक्षा मिल रही।
- नए कैंप और ड्रोन: जंगलों में निगरानी बढ़ी, नक्सलियों के छिपने की जगह कम।
हालांकि कुछ मुठभेड़ों में हमारे जवान भी शहीद हुए, लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद विकास का सबसे बड़ा दुश्मन है, और इसे जड़ से खत्म करेंगे।
आगे क्या?
सरकार का फोकस अब बचे हुए कोर इलाकों जैसे बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर पर है। नए साल में और कैंप बनेंगे, सरेंडर बढ़ेंगे। छत्तीसगढ़ पुलिस और CRPF मिलकर “नक्सल मुक्त बस्तर” का सपना पूरा करने में लगे हैं।
अगर आप बस्तर से हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं, तो सरेंडर नीति का लाभ उठाएं। हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। सुरक्षित और विकसित छत्तीसगढ़ सबका सपना है!

















