भोपाल। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के समर्थन में किए गए नग्न प्रदर्शन को लेकर देशभर में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा ने इस प्रदर्शन की कड़ी निंदा करते हुए राहुल गांधी का पुतला दहन किया और कांग्रेस पर देश की संस्कृति और मर्यादा को ठेस पहुँचाने का गंभीर आरोप लगाया।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल हाल ही में कांग्रेस के कुछ समर्थकों द्वारा एक विशेष माँग या मुद्दे को लेकर नग्न प्रदर्शन किया गया, जिसे कांग्रेस की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन न केवल भारतीय संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ हैं, बल्कि यह समाज में गलत संदेश देते हैं। भाजपा किसान मोर्चा ने इसे राहुल गांधी की राजनीति की देन बताते हुए उन्हें सीधे जिम्मेदार ठहराया।
भाजपा किसान मोर्चा ने क्या कहा?
पुतला दहन के दौरान भाजपा किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी सत्ता में वापसी के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि नग्न प्रदर्शन जैसी घटनाएं कांग्रेस की नाकाम और हताश राजनीति को दर्शाती हैं। नेताओं ने यह भी माँग की कि इस तरह के प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और कांग्रेस को इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि जिस नेता के समर्थक इस तरह के कृत्य करें, वह नेता देश का नेतृत्व करने के लायक नहीं है। इस दौरान भाजपा किसान मोर्चा के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।
पुतला दहन का राजनीतिक संदेश क्या है?
यह समझना जरूरी है कि भाजपा का यह कदम केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है। किसान मोर्चा का इस मुद्दे पर सामने आना यह दर्शाता है कि भाजपा इसे ग्रामीण और किसान वर्ग तक ले जाना चाहती है — यह संदेश देते हुए कि कांग्रेस की संस्कृति किसानों और ग्रामीण समाज की परंपराओं से मेल नहीं खाती। चुनावी राज्यों में इस तरह के प्रदर्शन का असर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में होता है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
अभी तक कांग्रेस की ओर से इस पुतला दहन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालाँकि कांग्रेस पहले भी भाजपा के ऐसे प्रदर्शनों को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश करार देती रही है।
राजनीतिक माहौल पर असर
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि देश का राजनीतिक माहौल तेजी से ध्रुवीकृत हो रहा है। जहाँ एक तरफ विपक्ष अपने विरोध के तरीकों से सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्तापक्ष हर ऐसे मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटा है।
















