विपक्षी विधायक आतिफ अकील द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा में गाय को लेकर उठाया गया मुद्दा इस समय राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 17 फरवरी 2026 को बजट सत्र के दौरान उन्होंने एक अशासकीय संकल्प (Private Resolution) पेश किया, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी।
आतिफ अकील की प्रमुख मांगें
कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने सदन में मांग की कि:
- राष्ट्रीय पशु का दर्जा: गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु (National Animal) घोषित किया जाना चाहिए।
- सम्मानजनक अंतिम संस्कार: मृत गायों का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ अनिवार्य किया जाए।
- चमड़ा व्यापार पर रोक: उन्होंने गाय के सम्मान को देखते हुए चमड़े के व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का सुझाव भी दिया।
- तर्क: उन्होंने कहा कि चूंकि हिंदू धर्म में गाय को ‘माता’ माना जाता है, इसलिए सरकार को इसे केवल राजनीति का मुद्दा बनाने के बजाय आधिकारिक दर्जा देना चाहिए।
राजनीति और प्रतिक्रिया: “पब्लिसिटी स्टंट” का आरोप
आपकी तरह ही भाजपा के कई नेताओं ने इसे केवल सुर्खियां बटोरने का जरिया बताया है:
- रामेश्वर शर्मा (BJP विधायक): उन्होंने इस मांग को “पब्लिसिटी स्टंट” करार दिया। उन्होंने आतिफ अकील को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में गंभीर हैं, तो मस्जिदों में जाकर मुस्लिम धर्मगुरुओं (मुल्ला-मौलवियों) से गाय की सुरक्षा की शपथ दिलवाएं।
- सत्ता पक्ष का रुख: भाजपा का कहना है कि वे पहले से ही गौ-सेवा और संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस केवल चुनाव और सदन के दौरान ऐसे मुद्दे उठाती है।
राज्य पशु (State Animal) की वर्तमान स्थिति
जैसा कि आपने सुझाव दिया कि कम से कम “राज्य पशु” ही घोषित कर दिया जाए, यहाँ वर्तमान स्थिति यह है:
- वर्तमान में मध्य प्रदेश का राजकीय पशु ‘बारहसिंगा’ (Swamp Deer) है।
- हालांकि, राजस्थान जैसे कुछ राज्यों ने ऊंट और गाय (पालतू श्रेणी) को विशेष संरक्षण का दर्जा दिया है, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी तक गाय को राजकीय पशु घोषित करने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सरकार की ओर से नहीं आया है।














