बिहार की राजनीति के दिग्गज और मोकामा से जेडीयू (JD-U) विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) हाल ही में एक साल से अधिक समय जेल में बिताने के बाद शपथ लेने के लिए बिहार विधानसभा पहुंचे। ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह को 3 फरवरी 2026 को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल वाहन से विधानसभा लाया गया।
हालांकि, जनता के प्रतिनिधि के तौर पर उनकी वापसी के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी लागू रहेंगी, जो सदन की कार्यवाही और उनके व्यवहार से जुड़ी हैं:
सदन में लागू रहने वाली मुख्य शर्तें
- पैरोल/पेरोल की अवधि: अनंत सिंह को अदालत से केवल शपथ ग्रहण करने के लिए पैरोल (Parole) मिली थी। शपथ पूरी होते ही उन्हें वापस बेउर जेल जाना पड़ा। वह सदन की सामान्य चर्चाओं में नियमित भाग नहीं ले सकेंगे।
- मीडिया से दूरी: सदन परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षाकर्मियों का सख्त घेरा रहेगा और उन्हें राजनीतिक बयानबाजी या मीडिया से विस्तृत चर्चा करने की अनुमति सीमित रहेगी।
- वोटिंग का अधिकार: जेल में रहने के दौरान विधायक सदन की सामान्य कार्यवाही में वोट नहीं दे सकते, जब तक कि अदालत से विशेष अनुमति न मिले (जैसे राज्यसभा चुनाव या अविश्वास प्रस्ताव के दौरान)।
- अनुपस्थिति की सूचना: चूंकि कोई भी सदस्य बिना अनुमति के 60 दिनों से अधिक अनुपस्थित नहीं रह सकता, इसलिए उन्हें स्पीकर को नियमित रूप से लिखित आवेदन देना होगा ताकि उनकी सदस्यता बरकरार रहे।
क्या है पूरा मामला?
अनंत सिंह को पिछले साल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले डुलार चंद यादव हत्याकांड के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। जेल में रहते हुए भी उन्होंने जीत दर्ज की। 3 फरवरी को जब वे विधानसभा पहुंचे, तो उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में खूब हो रही है।














