नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा ने संसद में टैक्स सुधारों को लेकर एक दिलचस्प और व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भारत में विवाहित जोड़ों (Married Couples) के लिए ‘जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न’ भरने का विकल्प (Optional) दिया जाना चाहिए। चड्ढा का तर्क है कि जब एक परिवार एक ही घर, एक ही किचन और एक ही बजट पर चलता है, तो टैक्स के समय उन्हें अलग-अलग व्यक्ति (Strangers) क्यों माना जाता है?
शादी करने पर क्यों होगी बचत? राघव चड्ढा ने मजाकिया लहजे में लेकिन तार्किक रूप से कहा कि अगर यह नियम लागू हुआ, तो लोग टैक्स बचाने के लिए शादी करने के लिए भी प्रेरित हो सकते हैं। उन्होंने दो उदाहरणों (Family A और Family B) के जरिए इस अंतर को समझाया:
- केस 1 (Family A): पति और पत्नी दोनों 10-10 लाख रुपये कमाते हैं। कुल आय 20 लाख है, लेकिन दोनों अलग-अलग टैक्स छूट का लाभ लेते हैं, जिससे उनका कुल टैक्स शून्य (Zero) हो जाता है।
- केस 2 (Family B): पति 20 लाख रुपये कमाता है और पत्नी घर संभालती है। यहाँ कुल आय वही 20 लाख है, लेकिन एक ही व्यक्ति की आय होने के कारण इस परिवार को करीब 1.92 लाख रुपये का टैक्स देना पड़ता है।
चड्ढा ने कहा, “एक छत, एक रसोई, लेकिन टैक्स के वक्त परिवार गायब हो जाता है।” उनका कहना है कि जॉइंट फाइलिंग से सिंगल-इनकम वाले परिवारों पर टैक्स का बोझ कम होगा।
क्या है इस प्रस्ताव का मकसद? राघव चड्ढा के अनुसार, यह प्रस्ताव ‘टैक्स इक्विटी’ (Tax Equity) यानी समानता पर आधारित है। विकसित देशों जैसे अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी में यह व्यवस्था पहले से लागू है। भारत में भी HUF (Hindu Undivided Family) को एक यूनिट माना जाता है, तो पति-पत्नी को क्यों नहीं?
इस प्रस्ताव से उन परिवारों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जहाँ एक साथी कमाता है और दूसरा घर की जिम्मेदारियां संभालता है, क्योंकि वे अपने पार्टनर की बची हुई टैक्स छूट (Exemptions) का लाभ उठा सकेंगे।
















